Thursday, June 27, 2013

Politics of Uttarakhand disaster


उत्तराखंड इस समय भयानक प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा हैं। लेकिन ऐसे हालात में भी हमारे देश के बेशर्म नेतागण राजनीति करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं। शर्म आती हैं मुझे खुद को एक ऐसे देश का नागरिक कहते हुए जहाँ की राजनीति ऐसी बदतर हैं। और कांग्रेस ने तो बेशर्मी की सारी हदे पार कर दी हैं। एक ओर जहाँ उतराखंड में लाखो लोग काल के गाल में समां रहे थे तो दूसरी ओर  कोंग्रेसियो  द्वारा  युवाओ के यूथ आईकॉन माने जाने वाले राहुल गाँधी स्पेन में  छुट्टिया  मना  रहे थे। जब नरेन्द्र मोदी ने आपदा के वक्त लोगो के बीच जाने की कोशिश की तो उन्हें गृह मंत्री शुशील कुमार शिंदे ने उन्हें वहाँ जाने की इजाजत नहीं दी.और मोहम्मद राहुल गाँधी को बेरोकटोक वहाँ जाने दिया गया। बाद में शिंदे का बयान आया की अगर अब मोदी चाहे तो वहाँ जा सकते हैं।
एक समय था जब राजा के भोजन कर लेने के बाद प्रजा को भोजन करने की इजाजत मिल जाती थी। यहाँ भी कांग्रेस ने कुछ ऐसा ही रवैया दिखाया। और हो भी क्यों ना ! जब सरकार अपनी हैं तो क़ानून भी तो अपनी ही होगा। हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय मनमोहन सिंह जी ने हवाई दौरा किया लेकिन पीरितो के बीच जाने की जहमत नहीं उठाई।धिक्कार हैं ऐसे प्रधानमंत्री पर। एक ओर जब संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में सैंडी तूफान आया था तो बराक ओबामा पीरितो से गले लग के रोये थे। और एक ओर हमारे प्रधानमंत्री!! जिन्हें सोनिया का पालतू कुत्ता माना जाता हैं। अब भी उतराखंड में हजारो लोग फंसे हुए हैं। ऐसा अनुमान हैं की ये संख्या ३ हज़ार से भी ज्यादा हो सकती हैं. और हमारे नेताओ को राहत का क्रेडिट लेने की पड़ी हैं। और राहत कार्य भी ऐसा की कांग्रेस के द्वारा भेजे गये राहत सामग्री के ट्रक का डिजल रास्ते में ही खत्म हो जा रहा हैं। इस देश में ये हालत हैं की एक वेश्या का भी ईमान होता हैं लेकिन नेताओ का नहीं। राहुल गाँधी मीडिया के सामने ये बताने आये कि उन्होंने राहत कार्य के लिये क्या किया लेकिन उन्होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि वे आपदा के वक्त स्पेन में क्या कर रहे थे!!

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